आदेश के बावजूद नही हुआ कोई कार्यवाही, जानिए क्यों,

संवाददाता अमर प्रताप वर्मा

रीडर टाइम्स

राजेन्द्र यादव एस0आई0और रोजगार सेवक के आगे कप्तान व उपजिलाधिकारी का आदेश पड़ा बौना

बलरामपुर, जनपद के उतरौला तहसील अन्तर्गत विकास खण्ड रेहरा बाजार के ग्राम सभा देवारीखेरा के मजरा (जटवलिया) का है पीड़ित भिखीराम ने बताया कि कई सालों से इन लोगों से मेरा जमीनी विवाद चल रहा था जिसको लेकर रोजगार सेवक व प्रधान प्रतिनिधि ने गांव में गुटबंदी करके मामले को और तूल पकड़ा दिया।जिसके बाद मामला काफी बढ़ गया और इस मामले में प्रधान प्रतिनिधि व रोजगार सेवक एवं जोखूराम रोजगार सेवक के पिता द्वारा पीड़ित पर गंभीर धाराओं में कई फर्जी मुकदमा लिखवाया गया और विपक्षियों को जमीन हड़पने के लिए पुलिस प्रशासन का भरपूर सहयोग मिलता रहा। जिससे पीड़ित बार बार उपजिलाधिकारी उतरौला की शरण में जाकर अपनी अर्जी लगाता रहा।और किसी तरह पीड़ित को कुछ राहत मिला।जिसके बाद उपरोक्त लोगों द्वारा पीड़ित का रास्ता बंद करने का षड्यंत्र रचा जाने लगा कि पीड़ित के सहन दरवाजे पर आर पार नाली बनवा दिया जाय। जिससे इनका रास्ता अवरुद्ध हो जाय।तब पीड़ित पुनः उप जिलाधिकारी की शरण मे गया।तब उपजिलाधिकारी द्वारा बीच सड़क में भूमिगत नाली बनाने का आदेश दिया गया लेकिन उस आदेश को विकास खण्ड के अधिकारियों को गुमराह कर उक्त आदेश को उपरोक्त लोगों ने ठंढे बस्ते में डाल दिया।कुछ दिन बाद पीड़ित ने पुनः उप जिलाधिकारी महोदय से फरियाद कर आदेश कराया कि बीच सड़क से नाली बनवाया जाय जिससे किसी का आवागमन बाधित न हो।लेकिन पुनः आदेश को दबंगों ने डर किनार कर दिया।और खण्ड विकास अधिकारी व पंचायत सचिव को गुमराह कर आदेश कराया कि पुलिस बल के साथ नाली का निर्माण पीड़ित के सहन दरवाजे पे ही कराया जाए और पुलिस का सहयोग लेकर नाली निर्माण के लिए जबरदस्ती कार्य चालू कर दिया गया तब पीड़ित ने विरोध किया तो दबंगों द्वारा पुलिस से पीड़ितों को काफी अपशब्द कहलवाया और फर्जी मुकदमे में फसाने की धमकी देते हुए कहा कि नाली तुम्हारे घर के सामने ही बनेगा तुम जो चाहो कर लो।और स्वयं ग्रामीणों को बुलाकर नाली निर्माण करना शुरू कर दिया।जिस पर पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से फोन से शिकायत की तो थानाध्यक्ष ने बुलाकर कहा कि तुम मेरे अधिकारी को क्यों फोन कर दिए।और कार्यवाही करने का आश्वासन तो दे दिया लेकिन कार्यवाही शून्य के बराबर।इसके बावजूद भी विपक्षी बार -बार निर्माण चालू कर देते हैं तो पीड़ित यूपी 112 बुलाता है तब निर्माण रुकता है लेकिन दूसरे दिन पुनः निर्माण चालू हो जाना पुलिस के संलिप्तता पर सवालिया निशान उठता है।