भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के बोर्ड ने आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने सोमवार को इसकी जानकारी दी | गर्ग ने बताया कि बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद एलआईसी-आईडीबीआई बैंक डील को अब कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत होगी, उन्होंने बताया कि आईडीबीआई बैंक को पूंजी की जरूरत है, इसलिए अधिकांश हिस्सेदारी शेयरों के प्रिफरेंशियल अलॉटमेंट के रूप में होगी |
गर्ग ने बताया कि ऑपन ऑफर होना इसमें संभव नहीं है, क्योंकि पब्लिक शेयरहोल्डिंग काफी कम है, हालांकि उन्होंने इसके साथ ही जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर एलआईसी ऐसा ऑफर भी ला सकती है |
एलआईसी बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद आईडीबीआई बैंक के बोर्ड से भी इसे मंजूरी मिलना जरूरी है, इंश्योंरेस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एलआईसी को आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने को मंजूरी दे दी थी | इंश्योरेंस रेग्युलेटर ने एलआईसी को 10.82 फीसदी की मौजूदा हिस्सेदारी को 51 फीसदी करने की इजाजत दे दी थी |
बता दें कि आईडीबीआई बैंक गैर निष्पादित संपत्ति (NPA) के बोझ तले दबा है, मार्च तिमाही तक इसका एनपीए 55,600 करोड़ रुपये पर पहुंच गया था | इस डील से बैंक को खुद को एनपीए के दबाव से बाहर निकलने के लिए जरूरी पूंजी मिल जाएगी |
आईडीबीआई बैंक में केन्द्र सरकार की 85 फीसदी हिस्सेदारी है और वित्त वर्ष 2018 के दौरान केन्द्र सरकार ने बैंक की 10,610 करोड़ रुपये से मदद भी की थी। आई़बीआई देश के बीमारू सरकारी बैंकों में सर्वाधिक एनपीए अनुपात वाला बैंक है।
मार्च में खत्म हुई तिमाही में आईडीबीआई बैंक गैर निष्पादित संपत्तियों के कारण फंसा कर्ज बढ़कर 55,600 करोड़ रुपये होने की समस्या से जूझ रहा है। मार्च को समाप्त तिमाही में बैंक ने 5,663 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया था।